Friendship Story in Hindi with Moral - Motivational Story

Friendship Story in Hindi with Moral – Motivational Story

Friendship Story in Hindi के माध्यम से आज आप लोगो को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा और कृपया समझिये कि क्या क्या वो चीज़ें हैं जो कि हमारे लिए बहुत अनमोल हैं Friendship Story in Hindi with Moral.

मेरी प्रिय पेंसिल.

कक्षा में बैठे-बैठे मैं उस पेंसिल को बड़ी देर से निहार रहा था जो पिताजी ने मुझे मेरे जन्मदिन पर दिलाई थी। वह मेरे लिए बहुत खास थी। अध्यापक कक्षा में गणित पढ़ा रहे थे परन्तु मेरा ध्यान अपनी पेंसिल की तरफ था।

Friendship Story in Hindi with Lyrics

उस पेंसिल से मेरी लिखावट में चार चांद लग गए थे। जब भी मैं उस पेंसिल का उपयोग करके अपनी परीक्षा देता, मुझे सदा ही परीक्षा में अच्छे अंक मिलते थे। ना जाने क्या, कुछ तो था उस पेंसिल में।

  • बगल में बैठा मेरा दोस्त सुरेश मुझे देख रहा था। उसने मुझसे पूछा, ‘दोस्त आज क्या बात है?
  • तुम्हारा पढ़ाई में मन नहीं लग रहा। तुम बड़ी देर से अपनी पेंसिल को निहार रहे हो।
  • थोड़ा घबरा कर मैंने कहा, ‘नहीं तो! ऐसी कोई बात नहीं है।’
  • सुरेश ने कहा, ‘तुम्हारी पेंसिल तो बहुत अच्छी है-  क्या मैं इससे एक बार लिख सकता हूं?
  • प्रिय मित्र होने के कारण मैं उसे मना नहीं कर सका और मैंने उसे अपनी पेंसिल दे दी।

अब कुछ ऐसा होने वाला था जिसकी मैंने बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की थी।

मेरा दोस्त काफी देर से उस पेंसिल से लिख रहा था, ना जाने क्या हुआ उसके हाथों से वह पेंसिल गिरी और टूट गई।

पेंसिल को टूटता देख मेरे होश उड़ गए। वह मेरी सबसे प्रिय पेंसिल थी, पेंसिल को टूटता देख मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाया और अपने दोस्त पर क्रोधित होने लगा।

मेरा दोस्त सुरेश मुझसे बार बार माफी मांग रहा था और कह रहा था कि मुझसे अनजाने में यह पेंसिल टूटी है। मैं अपने किए पर शर्मिंदा हूं। मैं सुरेश के जज्बात नहीं समझ सका और मन ही मन यह सोचने लगा कि जानबूझकर मेरे दोस्त ने मेरी पेंसिल तोड़ी है।

घर पर आते ही मेरा चेहरा व हाव भाव देखकर पिता जी समझ गए कि जरूर स्कूल में कुछ हुआ है। बातों ही बातों में पिताजी ने मुझसे स्कूल का हाल पूछ ही लिया।

पिता की सलाह  FATHER’S ADVICE

मैंने पिताजी को बताया, ‘वह पेंसिल जो आपने मेरे जन्मदिन पर मुझे दिलाई थी जिसे मैं अपनी प्रिय पेंसिल मानता था वह आज मेरे दोस्त सुरेश के हाथों टूट गई। मैं उससे बहुत क्रोधित हूं। बार-बार माफी मांगने पर भी मैंने उसे माफ नहीं किया।’

मेरी बात सुनकर पिताजी हंसने लगे और कहने लगे, ‘बस इतनी सी बात पर तुम अपने प्रिय मित्र से क्रोधित हो गए।
यह कदापि सही नहीं है।

बेटा! ”

माफी मांगने वाले से बड़ा होता है माफ करने वाला,” तुम्हें उसे माफ कर देना चाहिए था।

दोस्ती में छोटे-मोटे झगड़े तो चलते ही रहते हैं, परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि हम क्रोधित होकर उसे माफ ना करें या उससे बात ना करें। रही पेंसिल की बात, वह तो नई आ सकती है, परंतु जीवन में सच्चा मित्र बिछड़ा तो वह कभी लौटकर नहीं आएगा।’

पिताजी की बात सुनकर मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ। अगले ही दिन मैंने उसी तरह की पेंसिल अपने दोस्त सुरेश को तोहफे में दी और हम फिर से अच्छे मित्र बन गए।

Motivational Story सीख:- माफी मांगने वाले से बड़ा होता है, माफ करने वाला।

Guest Post by Mr. Ankit Sahu

Website: https://ankitstories.com/

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